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Patna News: पूर्व सैनिकों को जमीन दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप, 69 जवानों से जुड़े मामले में FIR

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना के बिहटा में 69 पूर्व सैनिकों को जमीन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जमीन और रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच शुरू की।

पटना, 19 अगस्त। पटना के बिहटा इलाके में पूर्व सैनिकों को जमीन उपलब्ध कराने के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आईआईटी अमहरा थाना क्षेत्र में सामने आए इस मामले में एक पूर्व सैनिक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में करीब 69 पूर्व सैनिकों से जमीन दिलाने के नाम पर रकम लेने और बाद में जमीन की रजिस्ट्री में कथित अनियमितता किए जाने का आरोप लगाया गया है।

मामले में पुलिस अब जमीन के स्वामित्व से लेकर रजिस्ट्री के दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेन-देन तक की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अनुसंधान के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संस्था के माध्यम से जमीन दिलाने का दावा

शिकायतकर्ता पूर्व सैनिक राघवेंद्र कुमार ने अमहरा थाना में आवेदन देकर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी है। आवेदन के अनुसार, सैनिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन इंडिया लिमिटेड के माध्यम से करीब 69 पूर्व सैनिकों को जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था।

शिकायत में संस्था के चेयरमैन लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश राणा और कैप्टेन अर्जुन कुमार सिंह को पार्टनर बताए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता के मुताबिक पूर्व सैनिकों को जमीन दिखाई गई और जमीन उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे राशि ली गई।

इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर कथित गड़बड़ी सामने आने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि पूरे लेन-देन में करोड़ों रुपये की राशि शामिल हो सकती है।

जमीन दिखाने के बाद ली गई रकम

शिकायतकर्ता के अनुसार, पूर्व सैनिकों को पहले जमीन दिखाई गई और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि तय प्रक्रिया के तहत उन्हें जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद संबंधित लोगों से पैसे लिए गए।

आरोप है कि रकम लेने के बाद जमीन की रजिस्ट्री के दौरान ऐसी अनियमितताएं सामने आईं, जिनसे पूर्व सैनिकों को नुकसान हुआ। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन जमीनों का सौदा कराया गया, उनका वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और पूर्व सैनिकों से ली गई रकम किस खाते या माध्यम से किस-किस व्यक्ति तक पहुंची।

दस्तावेजों की जांच में खुलेगा पूरा मामला

जांच एजेंसी के सामने इस मामले में कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं। पुलिस जमीन के मूल दस्तावेज, बिक्री से जुड़े कागजात, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।

इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि जमीन की रजिस्ट्री किन लोगों के नाम हुई, दस्तावेज तैयार कराने में कौन लोग शामिल थे और पूर्व सैनिकों से प्राप्त रकम का भुगतान किस तरीके से किया गया।

जांच में बैंक खातों और अन्य वित्तीय लेन-देन की जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि पुलिस को दस्तावेजों से किसी संगठित फर्जीवाड़े के संकेत मिलते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

69 पूर्व सैनिकों का मामला होने का दावा

शिकायत में करीब 69 पूर्व सैनिकों से जुड़ी राशि और जमीन के सौदे का उल्लेख किया गया है। अगर जांच में यह संख्या और आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला बड़े स्तर के जमीन और वित्तीय फर्जीवाड़े का हो सकता है।

पूर्व सैनिकों को जमीन दिलाने के नाम पर कथित तौर पर राशि लिए जाने का आरोप होने के कारण मामले की संवेदनशीलता भी बढ़ गई है। पुलिस अब शिकायत में बताए गए सभी तथ्यों का दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कर रही है।

FIR के बाद पुलिस ने तेज की जांच

शिकायत मिलने के बाद अमहरा थाना में कांड दर्ज कर लिया गया है। मंगलवार देर रात दानापुर एसडीपीओ-2 अमरेंद्र कुमार झा ने मामले की जांच जारी होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ गिरफ्तारी समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने जांच टीम को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जांच टीम जमीन से संबंधित दस्तावेजों के अलावा रजिस्ट्री रिकॉर्ड और कथित लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।

अभी आरोपों की जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच के दायरे में रखा है। यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कथित फर्जीवाड़े में वास्तविक रूप से कितनी राशि शामिल है और पूरे मामले में कितने लोग शामिल हैं। इसका खुलासा दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगा।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पूर्व सैनिकों को जिन जमीनों का भरोसा दिया गया था, उन जमीनों की कानूनी स्थिति क्या थी। अगर जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्री या भुगतान से संबंधित दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलती है तो जांच में आरोपित लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

फिलहाल बिहटा के इस मामले में पुलिस की जांच पर सभी की नजर है। 69 पूर्व सैनिकों से जुड़े होने के दावे के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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पूर्व सैनिकों से जुड़े मामले में जांच की पारदर्शिता जरूरी

बिहटा में पूर्व सैनिकों को जमीन दिलाने के नाम पर कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला कई स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और वास्तव में कितने लोगों से रकम ली गई।

पुलिस के सामने इस मामले में केवल आरोपित लोगों की भूमिका तय करने की चुनौती नहीं है, बल्कि जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्री प्रक्रिया और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी सामने लाने की जिम्मेदारी भी है। यदि शिकायत में बताए गए 69 पूर्व सैनिकों से वास्तव में रकम ली गई है तो प्रत्येक लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण होगी।

जमीन से जुड़े मामलों में दस्तावेज सबसे बड़ा साक्ष्य होते हैं। इसलिए मूल कागजात, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन का मिलान कर जांच आगे बढ़नी चाहिए। इससे यह भी पता चल सकेगा कि विवाद किसी व्यक्तिगत लेन-देन तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

फिलहाल आरोपों को साबित हुआ मानना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन पूर्व सैनिकों की बड़ी संख्या से जुड़े होने के दावे को देखते हुए मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है, ताकि दोषी सामने आएं और यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को आरोपों में घसीटा गया है तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट हो सके।

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